Land Registry New Rule 2026: जनवरी 2026 से भारत में जमीन और मकान की रजिस्ट्री का तरीका पूरी तरह बदल गया है। केंद्र सरकार ने डिजिटल इंडिया मिशन के तहत संपत्ति के लेनदेन को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब लोगों को सरकारी दफ्तरों में लंबी लाइनों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रजिस्ट्रेशन बिल 2025 के माध्यम से लागू किए गए ये नए नियम पूरे देश में लागू हो रहे हैं। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य संपत्ति के लेनदेन में पारदर्शिता लाना और फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करना है।
यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली और कई अन्य राज्यों में सफलतापूर्वक शुरू हो चुकी है। भूमि संसाधन मंत्रालय इस पूरी योजना की निगरानी कर रहा है और सुनिश्चित कर रहा है कि सभी राज्य इसे सही तरीके से लागू करें। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से रियल एस्टेट क्षेत्र में भरोसा बढ़ेगा और जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे। आम नागरिकों के लिए यह एक बड़ी राहत है क्योंकि अब भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी। पूरी प्रक्रिया में समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन की अनिवार्यता
नई रजिस्ट्री व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब पहचान की पुष्टि के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। संपत्ति खरीदने और बेचने वाले दोनों पक्षों को अपना आधार नंबर देना होगा। इसके साथ ही बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के लिए फिंगरप्रिंट और फेस रिकग्निशन की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। यह व्यवस्था किसी भी व्यक्ति की असली पहचान सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। अब नकली दस्तावेजों के आधार पर या किसी और के नाम पर संपत्ति की रजिस्ट्री कराना पूरी तरह असंभव हो गया है।
इस नई व्यवस्था में पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी अनिवार्य की गई है। वीडियो कॉलिंग के माध्यम से खरीदार, विक्रेता और दो गवाहों की उपस्थिति दर्ज की जाती है। यह रिकॉर्डिंग भविष्य में यदि कोई विवाद उत्पन्न होता है तो मजबूत सबूत के रूप में काम आएगी। सभी राज्य सरकारों को यह सुविधा अपने पोर्टल पर उपलब्ध कराने के स्पष्ट आदेश दिए गए हैं। सुरक्षा की यह दोहरी व्यवस्था धोखाधड़ी की सभी संभावनाओं को समाप्त कर देती है और संपत्ति के लेनदेन को पूरी तरह सुरक्षित बनाती है।
आवश्यक दस्तावेजों की सूची
संपत्ति की रजिस्ट्री कराने के लिए पांच मुख्य दस्तावेजों की जरूरत होती है। पहला और सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज आधार कार्ड या कोई सरकारी पहचान पत्र है जो पहचान साबित करने के लिए आवश्यक है। दूसरा जरूरी दस्तावेज पैन कार्ड है जो टैक्स से संबंधित औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए अनिवार्य है। तीसरा दस्तावेज संपत्ति का स्वामित्व साबित करने वाले कागजात हैं जैसे कि खाता-खतौनी, पुराने स्वामित्व प्रमाण या अन्य संबंधित दस्तावेज। चौथा दस्तावेज पते का प्रमाण है जिसके लिए बिजली या पानी का बिल मान्य होता है।
पांचवां आवश्यक दस्तावेज सर्किल रेट या संपत्ति का मूल्यांकन प्रमाण पत्र है जो संपत्ति के वास्तविक मूल्य को दर्शाता है। इन सभी दस्तावेजों को स्कैन करके राज्य के लैंड रजिस्ट्री पोर्टल पर अपलोड करना होता है। यदि कोई भी दस्तावेज गायब है या गलत है तो आवेदन तुरंत अस्वीकार कर दिया जाता है। सरकार ने विशेष सॉफ्टवेयर विकसित किया है जो नकली दस्तावेजों की पहचान कर सकता है और उन्हें फ़िल्टर कर देता है। इसलिए यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि सभी कागजात असली और सही हों।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया
ऑनलाइन रजिस्ट्री कराने के लिए सबसे पहले अपने राज्य के आधिकारिक लैंड रजिस्ट्री पोर्टल पर जाना होता है। वहां एक ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है जिसमें संपत्ति से जुड़ी सभी जानकारियां दर्ज करनी होती हैं। इसके बाद सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होते हैं और आधार कार्ड को सिस्टम से लिंक करना होता है। अगला कदम नजदीकी बायोमेट्रिक सेंटर में जाकर फिंगरप्रिंट और फेस वेरिफिकेशन पूरा करना है। इसके बाद वीडियो कॉलिंग के जरिए खरीदार, विक्रेता और गवाहों की रिकॉर्डिंग की जाती है।
अंतिम चरण में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस का ऑनलाइन भुगतान करना होता है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कुछ ही दिनों में डिजिटल सर्टिफिकेट ईमेल पर भेज दिया जाता है। इस डिजिटल प्रमाण पत्र का प्रिंटआउट भी निकाला जा सकता है जो कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य होता है। पूरी प्रक्रिया अब बहुत तेज और सुविधाजनक हो गई है। डिजिटल लॉकर की सुविधा से लोग अपने सभी पुराने रिकॉर्ड भी आसानी से देख और डाउनलोड कर सकते हैं। यह व्यवस्था कागजी कार्रवाई को कम करती है और पर्यावरण के लिए भी लाभदायक है।
नागरिकों के लिए सहायता सुविधाएं
सरकार ने इस नई व्यवस्था को सफल बनाने के लिए कई विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। हर राज्य में हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं जहां लोग अपनी समस्याओं का समाधान पा सकते हैं। विशेष प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं जहां डिजिटल रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया विस्तार से सिखाई जाती है। कॉमन सर्विस सेंटर भी लोगों की मदद कर रहे हैं और उन्हें ऑनलाइन आवेदन भरने में सहायता प्रदान कर रहे हैं। एसवीएएमिट्व या भूलेख पोर्टल से जमीन की पूरी जानकारी मुफ्त में प्राप्त की जा सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जहां इंटरनेट की सुविधा सीमित है, वहां सरकार तेजी से ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी बढ़ा रही है। लोगों को नई तकनीक से परिचित कराने के लिए हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में ट्यूटोरियल वीडियो भी उपलब्ध कराए गए हैं। हर जिले में हेल्प डेस्क की व्यवस्था की गई है जहां विशेषज्ञ मौजूद रहते हैं। मोबाइल वैन गांव-गांव जाकर लोगों को इस नई प्रणाली के बारे में जानकारी दे रही हैं और उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दे रही हैं।
अस्वीकरण: यह लेख जनवरी 2026 तक उपलब्ध जानकारी और सरकारी घोषणाओं पर आधारित है। वास्तविक नियम, प्रक्रियाएं और शुल्क विभिन्न राज्यों में अलग-अलग हो सकते हैं। पाठकों से विनम्र अनुरोध है कि संपत्ति की रजिस्ट्री कराने से पहले अपने राज्य के आधिकारिक पोर्टल और संबंधित सरकारी कार्यालय से सभी जानकारियों की पुष्टि अवश्य करें। यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे किसी भी प्रकार की कानूनी या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। किसी भी संपत्ति लेनदेन से पहले योग्य विशेषज्ञ या वकील की सलाह अवश्य लें।


